नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित ‘भारत एक्सप्रेस उर्दू’ के तीसरे राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उर्दू भाषा और उर्दू पत्रकारिता के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘नये भारत की बात, उर्दू के साथ’ था।
उर्दू को किसी एक धर्म या देश से जोड़ना उचित नहीं: रिजिजू
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म या किसी एक देश की भाषा नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान की अपनी भाषा है। उन्होंने उर्दू को एक समृद्ध भाषा बताते हुए इसके व्यापक इस्तेमाल और आम लोगों तक इसकी पहुंच बढ़ाने की बात कही।
रिजिजू ने उर्दू को लेकर बनी उन धारणाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें इसे किसी विशेष देश या समुदाय से जोड़कर देखा जाता है। उनके अनुसार उर्दू का भारतीय इतिहास और संस्कृति से गहरा संबंध है।
युवाओं को उर्दू से जोड़ने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई है। ऐसे में उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए युवाओं तक Instagram और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए पहुंचना महत्वपूर्ण है। उन्होंने उर्दू की खूबसूरती और मिठास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में युवाओं से कहा कि अगर उन्हें इश्क करना है तो उर्दू सीखनी चाहिए। उनके संबोधन में उर्दू को भावनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने वाली भाषा के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
भारतीय सिनेमा और संगीत में उर्दू का योगदान
रिजिजू ने भारतीय सिनेमा और पुराने फिल्मी गीतों में उर्दू के योगदान का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने साहिर लुधियानवी और नौशाद जैसे नामों का जिक्र करते हुए कहा कि उर्दू के शब्दों ने भारतीय फिल्मी गीतों को विशेष अभिव्यक्ति दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू अब केवल क्षेत्रीय भाषा तक सीमित नहीं है और इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होता है।
उर्दू पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया पर चर्चा
‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ का केंद्र उर्दू पत्रकारिता रहा। कार्यक्रम में उर्दू पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य के साथ-साथ डिजिटल मीडिया, नई तकनीक और राष्ट्र निर्माण में उर्दू पत्रकारिता की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उद्घाटन सत्र में किरेन रिजिजू के अलावा नजीब जंग, शाहनवाज हुसैन और प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
निष्कर्ष
किरेन रिजिजू का यह संबोधन मुख्य रूप से उर्दू को किसी एक समुदाय तक सीमित न मानने, युवाओं को भाषा से जोड़ने और डिजिटल माध्यमों के जरिए उर्दू के विस्तार पर केंद्रित रहा। यह बयान 17 सितंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ कार्यक्रम में दिया गया था।
Disclaimer:
यह समाचार उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों और कार्यक्रम संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किरेन रिजिजू के विचारों को उनके कार्यक्रम में दिए गए संबोधन के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

