पारपेठ में बड़ा सवाल: जनता के मुद्दे उठेंगे या ताकतवरों की मर्जी चलेगी?

MALKAPUR PARIVARTAN
By -shaikh isa
0
पारपेठ में जनहित के मुद्दों और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल


पारपेठ में जनहित के मुद्दों पर खबर करने वाले पत्रकारों के सामने सुरक्षा और स्वतंत्रता का सवाल

मलकापुर | पारपेठ

जनता की समस्या उठाना पत्रकार का अपराध नहीं, उसकी जिम्मेदारी है।

लेकिन जब जनता से जुड़े किसी मुद्दे को सामने लाने के बाद पत्रकार को धमकी मिले, तो मामला केवल एक पत्रकार तक सीमित नहीं रहता। सवाल उठता है कि क्या अब पत्रकारों को भी खबर प्रकाशित करने से पहले यह देखना पड़ेगा कि सामने वाला व्यक्ति कितना प्रभावशाली है?

क्या यह तय होगा कि कौन-सा मुद्दा उठाना है और कौन-सा मुद्दा नहीं?

क्या पत्रकार को यह सोचना पड़ेगा कि खबर से कोई ठेकेदार नाराज होगा, कोई राजनीतिक व्यक्ति नाराज होगा या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के समर्थक उसके खिलाफ खड़े हो जाएंगे?

अगर ऐसा माहौल बनता है, तो सबसे बड़ा नुकसान उस आम नागरिक का होगा, जिसकी आवाज पत्रकार के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचती है।

सड़क की समस्या हो, नाली की समस्या हो, पानी की किल्लत हो, बिजली की परेशानी हो या किसी सरकारी काम की गुणवत्ता और प्रक्रिया पर सवाल हो—पत्रकार का काम इन मुद्दों को सामने लाना है।

लेकिन पत्रकारिता का मतलब किसी व्यक्ति को बदनाम करना भी नहीं है।

फिर सवाल यह है कि यदि खबर तथ्य और जनहित पर आधारित है, तो धमकी की जरूरत क्यों पड़ती है?

क्या ताकत के आधार पर खबर तय होगी?

ठेकेदार हो या नेता, अधिकारी हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति—उसकी ताकत यह तय नहीं कर सकती कि जनता का कौन-सा सवाल खबर बनेगा।

खबर की ताकत उसके प्रमाण में होनी चाहिए, किसी व्यक्ति के प्रभाव में नहीं।

और यदि किसी पत्रकार को धमकी देकर किसी मुद्दे से पीछे हटाने का प्रयास किया जाता है, तो यह केवल पत्रकार के लिए चिंता का विषय नहीं है। यह समाज के लिए भी गंभीर सवाल है।

क्योंकि आज अगर किसी एक पत्रकार को डराकर चुप कराया गया, तो कल किसी आम नागरिक की शिकायत भी शायद सामने नहीं आएगी।

सवाल सीधा है

क्या पत्रकार को खबर करने से पहले यह देखना पड़ेगा कि “सामने वाला कितना पावरफुल है?”

या फिर पत्रकार को यह देखना चाहिए कि “मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है और उसके पास प्रमाण कितने मजबूत हैं?”

हम मानते हैं कि लोकतंत्र में सवाल पूछना किसी की दुश्मनी नहीं है।

सवाल पूछना पत्रकारिता है।
जवाब मांगना पत्रकारिता है।
और जवाब को जनता तक पहुंचाना भी पत्रकारिता है।

मुद्दा व्यक्ति नहीं—जनहित है।

इसलिए पारपेठ से उठ रहा यह सवाल केवल एक पत्रकार का सवाल नहीं है—

क्या जनता के मुद्दे उठाने वाले पत्रकार को डर के माहौल में काम करना पड़ेगा, या वह तथ्य और संविधान के भरोसे स्वतंत्र होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकेगा?

जनता सवाल पूछती रहेगी।
पत्रकार सवाल उठाता रहेगा।
और जवाब देने की जिम्मेदारी व्यवस्था की होगी।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)
5/related/default